-दिनेश ठाकुर
लॉकडाउन के दौरान नई फिल्मों के अधिकार हासिल करने के लिए ओटीटी कंपनियों ( OTT Companies ) में बड़ी-बड़ी बोलियां लगाने की जो होड़ मची थी, अब थमती लगती है। वजह यह है कि मार्च से अब तक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आईं फिल्मों में से ज्यादातर घाटे का सौदा साबित हुई हैं। इन फिल्मों के मुकाबले ओटीटी पर पुरानी हिन्दी फिल्में और हॉलीवुड की फिल्में ज्यादा देखी जा रही हैं। हॉलीवुड की कंपनी डिज्नी हॉटस्टार ने अक्षय कुमार ( Akshay Kumar ) की ‘लक्ष्मी’ ( Laxmii Movie ) के अधिकार के लिए काफी ऊंची कीमत चुकाई थी। ओटीटी पर इस फिल्म के निराशाजनक प्रदर्शन ने डिज्नी हॉटस्टार के होश उड़ा दिए हैं। नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और जी5 जैसे बड़े ओटीटी खिलाड़ी भी इससे पहले ऐसे झटके खा चुके हैं। दरअसल, अधिकार खरीदने की होड़ में इनमें से किसी ने फिल्मों के कंटेट पर ध्यान नहीं दिया। सिर्फ पोस्टर पर सितारों के चेहरे देखकर फिल्म खरीद ली। आंख मूंदकर किए गए सौदों के प्रतिकूल नतीजे अब सामने आ रहे हैं। लगातार झटके खाने के बाद ओटीटी कंपनियों ने तय किया है कि अब फिल्में देखने के बाद ही सौदे किए जाएंगे। डेविड धवन की ‘कुली नं. वन’ और अजय देवगन की ‘भुज : द प्राइड ऑफ इंडिया’ के अधिकार पहले ही खरीदे जा चुके हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग से पहले इन फिल्मों को देखने की कवायद हो रही है।

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कई साल से इसी तरह हो रहे हैं सौदे
लोग दस रुपए का बिस्किट पैकेट भी देख-परख कर खरीदते हैं, ओटीटी कंपनियां अब तक फिल्म देखे बगैर करोड़ों के सौदे कर रही थीं, यह हैरानी की बात नहीं है। पिछले 15-20 साल के दौरान भारतीय फिल्म बाजार में हॉलीवुड और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के दाखिले के बाद फिल्मों के ज्यादातर सौदे इसी तरह आंख मूंदकर हो रहे हैं। कुछ कंपनियां इसका खामियाजा भी भुगत चुकी हैं। हॉलीवुड की सोनी पिक्चर्स को भारत में अपना कारोबार समेटना पड़ा। वहां की एक और बड़ी कंपनी यूनिवर्सल पिक्चर्स का भारतीय दफ्तर दिसम्बर में बंद होने वाला है। सोनी पिक्चर्स ने संजय लीला भंसाली, रणबीर कपूर और सोनम कपूर के नाम देखकर ‘सांवरिया’ (2007) में तगड़ा निवेश किया था। फिल्म की नाकामी ने उसे डुबो दिया।

95 करोड़ की ‘बॉम्बे वेलवेट’ ने दिया झटका
फॉक्स स्टार स्टूडियो ने अनुराग कश्यप की ‘बॉम्बे वेलवेट’ (2015) के पोस्टर पर रणबीर कपूर और अनुष्का शर्मा को देखकर 95 करोड़ रुपए लगा दिए। यह फिल्म भी भारी घाटे का सौदा साबित हुई। फॉक्स स्टार स्टूडियो को ‘मि. एक्स’, ‘शानदार’ और ‘अकीरा’ ने भी तगड़े झटके दिए। हॉलीवुड कंपनियों का आगमन 2000 में ऐसे समय हुआ था, जब भारत में मल्टीप्लेक्स खुलने का सिलसिला चल पड़ा था और पॉप कॉर्न खाते हुए फिल्म देखने को नए तकनीकी अनुभव से जोड़ा जा रहा था। इन कंपनियों ने इस हकीकत पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया कि फिल्म देखना तकनीकी अनुभव से ज्यादा भावनाओं से जुड़़ा मामला है।

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वाल्ट डिज्नी की भारत से विदाई
हॉलीवुड की एक और कंपनी वाल्ट डिज्नी ने आशुतोष गोवारीकर के नाम पर ‘मोहनजो दाड़ो’ पर 115 करोड़ रुपए का दांव खेला। यह सोचकर कि वे इससे पहले ‘लगान’ बना चुके हैं। फिर फिल्म के पोस्टर पर ऋतिक रोशन का आकर्षण भी था। लेकिन फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही और वाल्ट डिज्नी की भारत से विदाई हो गई। गोवारीकर की एक और फिल्म ‘खेलेंगे हम जी जान से’ पर पीवीआर पिक्चर्स ने 35 करोड़ रुपए यह सोचकर लगाए कि इससे दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन भी जुड़े हुए थे। यह फिल्म सिर्फ पांच करोड़ रुपए का कारोबार कर सकी।





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