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इंदौर22 मिनट पहले

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कार्रवाई के पहले बाबा के आश्रम से सामान निकालकर बाहर किया गया।

भाजपा और कांग्रेस दोनों शासन काल में राज्यमंत्री का दर्जा पा चुके नामदेव दास त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा के ग्राम जम्बूडी हप्सी के खसरा नंबर 610/1 और 610/2 की 46 एकड़ से ज्यादा जमीन में से दो एकड़ पर फैले लग्जरी आश्रम पर जिला प्रशासन ने रविवार को अवैध कब्जे तोड़ने की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। सुबह करीब 7 बजे से शुरू हुई कार्रवाई दोपहर 12 बजे खत्म हुई और पूरे आश्रम को चार पोकलेन की मदद से ध्वस्त कर दिया गया।

कार्रवाई के बाद 10 ट्रकों में सामान भरा गया और बाबा के साथी गंगादास के सुपुर्द कर दिया गया। इसमें रजाई, गद्दे, टीवी, फ्रीज, एसी, अलमारी, कुर्सियां, पेंटिग्स, फोटो, टेबल, बुलेट, कार, बाथरूम का सामान, क्रीम, सूटकेस, किचन का सामान, पलंग, कमंडल, माला आदि कई सामग्री शामिल हैं। आश्रम में सीसीटीवी भी लगे हुए थे। इस दौरान अशांति फैलाने के आरोप में बाबा और उनके सहयोगी रामचरण दास, संदीप द्विवेदी, रामबाबू यादव, मोनू पंडित, जगदीप सहित कुल सात लोगों को एसडीएम राजेश राठौर द्वारा अगले आदेश तक जेल भेज दिया गया। बाबा को सेंट्रल जेल की बैरक नंबर 5 में रखा है, जहां वे आराम से ध्यान की मुद्रा में बैठे हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने जेल में कोई विरोध नहीं किया है और प्रशासन की कार्रवाई से खौफ में नजर आ रहे हैं।

जेल पहुंचे बाबा ने किसी प्रकार का विरोध नहीं किया।

जेल पहुंचे बाबा ने किसी प्रकार का विरोध नहीं किया।

सीएम को रात में ही दे दी थी कार्रवाई की सूचना
सूत्रों के अनुसार आश्रम पर हो रही कार्रवाई की सूचना प्रशासन ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को शनिवार रात में ही दे दी थी। वहां से हरी झंडी मिली कि अवैध कब्जा है तो सख्ती से कार्रवाई की जाए। बाबा ने हाल ही में मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर हुए उपचुनाव में शिवराज सरकार के खिलाफ लोकतंत्र बचाओ यात्रा भी निकाली थी। सीएम से हरी झंडी के बाद रात को कार्रवाई की रूपरेखा बनी।

सुबह 6 बजे टीमों को बताया, आश्रम पर कार्रवाई करना है
कलेक्टर मनीष सिंह ने धर्मस्थल और कानून व्यवस्था को देखते हुए इसमें अलग-अलग अधिकारियों की टीम गठित की। रात तक कलेक्टर, डीआईजी, निगमायुक्त और एडीएम अजय देव शर्मा को ही इसकी जानकारी थी। पूरी टीम को सुबह थाने पर एकत्र होने के लिए कहा गया। सुबह 6 बजे सभी को बताया गया कि बाबा के आश्रम पर कार्रवाई है। इसके बाद एसडीएम राठौर और नायब तहसीलदार मनीष श्रीवास्तव की टीम को बाबा के पास भेजा गया। उनके द्वारा विरोध करने पर गिरफ्तार किया गया। एडीएम शर्मा ने मौके पर टीम का नेतृत्व किया। कार्रवाई के दौरान करीब 100 जवानों के फोर्स के साथ एसपी पश्चिम महेशचंद जैन, एएसपी प्रशांत चौबे, तीन सीएसपी, पांच टीआई सहित कंट्रोल रूम का रिजर्व बल और डीआरपी लाइन के रिजर्व बल के जवान मौजूद थे।

बाबा के आश्रम से एक बंदूक भी मिली है।

बाबा के आश्रम से एक बंदूक भी मिली है।

आश्रम से दस ट्रक सामान मिला
आश्रम से दस ट्रक सामान निकला है। सामान हटाने में निगमकर्मियों को दो घंटे लग गए। इसमें महंगे सोफे, टीवी, एसी, फ्रिज, अलमारी, क्रिस्टा कार जो मूसाखेड़ी के किसी रमेश सिंह तोमर के नाम पर है, एक बंदूक, बुलेट, महंगी क्रीम, साबुन आदि शामिल है।

चार माह पहले निगम से गया था नोटिस, अब तहसीलदार कोर्ट से आदेश
चार माह पहले नगर निगम से बाबा को आश्रम के अवैध निर्माण हटाने का नोटिस गया था, लेकिन तब सामने आया कि यह जगह निगम की सीमा में नहीं आती है। इसके बाद प्रशासन के पाले मंे गेंद गई। लेकिन जम्बूडी हप्सी गांव में पंचायत होने के चलते मामला पहले पंचायत के पास कार्रवाई के लिए गया और वहां से प्रस्ताव पास कर एसडीएम हातोद को पत्र गया कि बाबा पर कार्रवाई की जाए। इसके बाद तहसीलदार हातोद ममता पटेल की कोर्ट में केस चला और इस दौरान बाबा ने निर्माण के संबंध में कोई दस्तावेज पेश नहीं किए, जिसके चलते शनिवार को उनके आश्रम पर कब्जा हटाने का नोटिस चस्पा कर दिया गया और दो हजार का अर्थदंड भी लगाया गया।

सामान को बाबा के शिष्य के सुपुर्द कर दिया गया।

सामान को बाबा के शिष्य के सुपुर्द कर दिया गया।

गैजेट के शौकीन इसलिए कंप्यूटर बाबा कहलाए, 2014 से राजनीति करने की चाह
1965 में जन्मे नामदेव दास त्यागी को नरसिंहपुर में साल 1998 में एक बाबा ने उनके गैजेट प्रेम और हमेशा लैपटॉप साथ में रखने के चलते कम्प्यूटर बाबा नाम दिया था। साल 2014 में उन्होंने आम आदमी पार्टी से उन्हें उम्मीदवार बनाने की मांग की थी, लेकिन बात नहीं बनी। साल 2018 में सीएम शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ नर्मदा यात्रा में हुए पौधारोपण को लेकर आरोप लगाए और यात्रा की घोषणा की। अप्रैल 2018 में राज्यमंत्री बना दिए गए। बाद में भाजपा से मोहभंग हुआ और कांग्रेस की तरफ झुक गए। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की जीत के लिए यज्ञ भी किया।

बाबा के दो और जगह मिले कब्जे
बाबा के अहिल्यापुरी एक्सटेंशन में और सुपर कॉरिडोर पर करीब साढ़े तीन हजार वर्गफीट एरिया में भी कब्जे मिले हैं। इसमें अहिल्यापुरी मामले में निगम द्वारा जांच हो रही है। इन सभी जगहों पर भी अब जल्द कब्जे हटाने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रशासन को बाबा के कई बैंक अकाउंट होने और उनमें असामान्य तरीके से पैसा जमा होने की भी शिकायतें मिली हैं। प्रशासन ने बाबा की जमीनों के साथ ही उनके खातों की भी जांच शुरू करवा दी है। जरूरत होने पर आयकर विभाग की मदद ली जाएगी।

जेसीबी और पोकलेन मशीन की मदद से की गई कार्रवाई।

जेसीबी और पोकलेन मशीन की मदद से की गई कार्रवाई।

हमेशा सुर्खियों में रहे

  • बाबा ने गोम्मटगिरि आश्रम की जमीन पर हुए विवाद के बाद सबसे पहले राजबाड़ा पर आमरण अनशन किया था। उस समय तत्कालीन मंत्री और वर्तमान भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अनशन खत्म करवाया था।
  • अंबिकापुरी स्थित श्रीसिद्ध कालीधाम मंदिर को लेकर हुई हत्या के मामले में भी बाबा को लेकर आरोप लगे थे।
  • 2011 में कम्प्यूटर बाबा ने गोम्मटगिरि आश्रम पर लघु कुंभ आयोजित किया था। इसके प्रचार के लिए उन्होंने हेलिकॉप्टर से गांव-गांव में पर्चे वितरित किए थे।

बाबा पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा कि इंदौर में बदले की भावना से कम्प्यूटर बाबा का आश्रम व मंदिर बिना नोटिस दिए तोड़ा जा रहा है। यह राजनीतिक प्रतिशोध की चरम सीमा है। मैं इसकी निंदा करता हूं। विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि पहले बाबा भाजपा के साथ थे, तब अतिक्रमण नहीं दिखा। पहले वह संत लग रहे थे और अब शैतान लग रहे हैं। देपालपुर से कांग्रेस विधायक विशाल पटेल ने कहा कि जिसे प्रशासन तोड़ रहा है, वो मंदिर कलोता समाज ने बनवाया था। इस पर कार्रवाई का कलोता समाज विरोध करता है। सिंह सोमवार को इंदौर आकर दोपहर 2 बजे बाबा से मिलने सेंट्रल जेल जाएंगे। वहीं इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने कम्प्यूटर बाबा को लेकर बयान दिया है कि उन्हें धर्म की पताका फहराना चाहिए थी, लेकिन वो राजनीति का वायरस फैला रहे थे। उन्हें धर्म को आगे ले जाना चाहिए, लेकिन वो उस तरह के काम न करते हुए जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे थे, वह किसी संत को शोभा नहीं देता। उनमें राजनीति का वायरस घुस गया था।
घर से मिली बंदूक का नहीं मिला लाइसेंस, रिकॉर्ड से चेक करेंगे
कम्प्यूटर बाबा के घर से मिली बंदूक का लाइसेंस नहीं मिला है। सोमवार को कलेक्टोरेट में लाइसेंस शाखा से चेक करवाएंगे। यदि लाइसेंसी बंदूक होगी तो केस दर्ज नहीं होगा और लाइसेंस नहीं मिला तो पुलिस केस दर्ज कर सकती है।

अवैध कब्जा था, अब यहां गोशाला बनेगी : कलेक्टर
कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि यहां अवैध कब्जा था। नोटिस देने टीम गई थी, लेकिन किसी ने नहीं लिया तो चस्पा भी किया था। पर्याप्त समय देकर कार्रवाई हुई है। इस जगह को धार्मिक रूप से विकसित किया जाएगा और गोशाला बनेगी।



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