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भोपाल (राजेश शर्मा)9 मिनट पहले

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गाय पर फिर सियासत शुरू हो गई। यहां चिंता गाय के पालन पोषण की नहीं बल्कि उन करोड़ों हिंदुओं की आस्था की है जो दोनों पार्टियों का बड़ा वोट बैंक हैं। बुधवार की सुबह अचानक शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर सूचना दी- गौ कैबिनेट बनेगी। इसने सबको चौंका दिया। यहां तक कि पशुपालन मंत्री प्रेमसिंह पटेल को भी इसकी भनक नहीं लगी। वह इस कैबिनेट के सदस्य भी हैं। उन्होंने भास्कर से कहा- मुझे गौ कैबिनेट के बारे में अधिकृत जानकारी नहीं है।

छह साल से गाय को लेकर प्रदेश की सियासत में लगातार नए दावे किए जा रहे हैं लेकिन शिवराज सरकार कोई ठोस फैसला नहीं कर पाई। इसी बीच 15 महीने रही कांग्रेस एक हजार गौशाला का फॉर्मूला ले आई और यह मुद्दा उपचुनाव में भी जमकर उठाया। सत्ता में फिर मजबूत होते ही शिवराजसिंह ने गौ कैबिनेट बनाकर कमलनाथ के ‘गौशाला मिशन’ की पुरानी सुर्खियों को पूरी तरह दबा देने की कोशिश की है। शिवराजसिंह चौहान 2018 में खजुराहो में जैन मुनि विद्यासागर महाराज के चातुर्मास के दौरान फिर से सरकार में आने पर गौ मंत्रालय बनाने की घोषणा कर चुके थे। जिसे अब पूरा किया।

दूसरी बड़ी वजह है- उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में गौधन न्याय योजना लागू करने की घोषणा की थी। इसके तहत पशुपालकों से गोबर खरीद कर खाद बनाने की बात कही गई थी। लेकिन भाजपा फिर सत्ता में लौट आई है। गो कल्याण मुद्दे को कहीं स्थायी तौर पर कांग्रेस हासिल नहीं कर ले, यही सोचकर चौथी बार मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान ने गौ कैबिनेट का ऐलान कर दिया। कैबिनेट की पहली बैठक 22 नवंबर को आगर मालवा में आयोजित करने का निर्णय भी ले लिया गया है। राज्य सरकार ने इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं।

जिसे कमलनाथ निजी हाथों में सौंपना चाहते थे, उसी जगह पहली कैबिनेट बैठक

गौ कैबिनेटकी पहली बैठक एशिया के सबसे बड़े गो अभ्यारण्य आगर मालवा में हो रही है। यह सुसनेर तहसील के सालरिया गांव में करीब 11 सौ एकड़ में फैला है। इस अभ्यारण को बनाने का निर्णय शिवराज सिंह चौहान ने दूसरे कार्यकाल के अंतिम समय में लिया था। 2013 के विधानसभा चुनाव के पहले इसका भूमिपूजन किया गया। अभ्यारण्य का निर्माण 2017 में 10 हजार गायों को रखने की क्षमता के हिसाब से किया है। वर्तमान में यहां करीब 5 हजार गाय हैं। लेकिन फंड की कमी के चलते इसका संधारण नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि कमलनाथ सरकार ने जनवरी 2019 में इसे निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया था, लेकिन मार्च में सरकार गिर गई। अब मुख्यमंत्री ने गो कैबिनेट की पहली बैठक आगर मालवा में करने का ऐलान किया है।
और हकीकत देखिए…गाय की खुराक का बजट 20 से घटाकर 1.60 रुपए कर दिया

मध्य प्रदेश की सियासत में हर बार गाय को मुद़दा बनाया जाता है। गाय और गोशाला को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। इस समय राज्य में लगभग 1300 गोशालाएं हैं जिनमें 1.80 लाख गायों को रखा गया है। बताया जाता है कि पिछली कमलनाथ सरकार ने बजट में प्रति गाय 20 रुपए का आवंटन किया था। पिछले वित्तीय वर्ष में पशुपालन विभाग का बजट 132 करोड़ रुपए रखा था जबकि 2020-21 में तो यह सीधे 11 करोड़ रुपये हो गया, यानी लगभग 90 फीसदी की कटौती कर दी गई। यानी प्रति गाय सरकारी खुराक 20 रुपए से घटकर 1 रुपए 60 पैसे हो गई।

2014 में मप्र की राजनीति में आई थी गाय, फिर तो लगातार योजनाएं बनती गईं

– भाजपा ने 2014 में अपने घोषणा पत्र में गौ रक्षा का मुद्दा उठाया।

– एमपी में गायों के आधार कार्ड बनवाए गए।

– 2017 में बीजेपी के ऐलान के बाद देश का पहला गौ अभ्यारण्य बना।

– विधानसभा 2018 के पहले भाजपा ने गौमाता को जमकर उठाया।

– ‘1962 पशुधन संजीवनी’ योजना के नाम से भाजपा ने बनाई मोबाइल वैन।

– भाजपा के बाद कांग्रेस को भाया गौमाता का साथ

– कांग्रेस ने 2018 के घोषणा पत्र में हर ग्राम पंचायत में गौशाला खोलने का किया ऐलान

– प्रदेश में 1 हजार गौशाला खोलने के आदेश के बाद कांग्रेस लाई ‘कैटल रेस्क्यू अभियान’

– इसके बाद कमलनाथ सरकार लाई नया प्लान, गाय का ध्यान रखने के लिए मोबाइल एप।

– अब शिवराज सरकार ने गो कैबिनेट का गठन किया।



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